ब्रह्म मुहूर्त, सूर्योदय से लगभग 72 मिनट पहले का समय होता है। यह समय शास्त्रों के अनुसार, निद्रा त्यागने के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। मनुस्मृति में इसका वर्णन इस प्रकार है "ब्राह्मे मुहूर्ते या निद्रा सा पुण्यक्षयकारिणी," अर्थात प्रातःकाल की निद्रा पुण्यों और सत्कर्मों का नाश करती है। इस समय जागने से मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

ब्रह्म मुहूर्त में उठने के शारीरिक लाभ

ब्राह्ममुहूर्त में उठने वाला पुरूष सौन्दर्य, लक्ष्मी, स्वास्थ्य, आयु आदि वस्तुओं को प्राप्त करता है।

 उसका शरीर कमल के समान सुन्दर हो जाता है। इस समय किसी भी गृह -नक्षत्र का बुरा असर नहीं होता..

जिस तरह गर्मी के दिनों में हमारे शरीर में गर्मी अधिक होगी ; उसी प्रकार बाहरी विश्व की हर घटना का असर शरीर के अन्दर होगा. ब्रम्ह मुहूर्त हर दिन की शुरुवात है. इस समय प्राण और अपान वायु कार्यरत रहती है. इस समय की तुलना गर्भवास और गर्भ से बाहर आने के बीच के समय से की जाती है।

इसीलिए गर्भ में रहते हमारे शरीर पर जो जो गलत प्रभाव हुए है , शारीरिक या मानसिक ; उसे सुधारने का अवसर हमें रोज़ ब्रम्ह मुहूर्त में प्राप्त होता है. इसीलिए कई जेनेटिक बीमारियाँ या असाध्य रोग ब्रम्ह मुहूर्त में उठ कर स्नान -योग -ध्यान करने से ठीक हो सकती है।

मानसिक और आध्यात्मिक लाभ

 मनुष्य शरीर में रोज ब्रम्ह मुहूर्त में सहस्त्रार चक्र से एक बूंद अमृत तत्व निकलता है इसी लिए ब्रम्हमुहूर्त को योगतांत्रिक साधनाओ में अत्यधिक महत्वपूर्ण समय माना गया है लेकिन यह अमृत तत्व का शरीर में योग्य संचार नहीं हो पता है। इस समय साधना करने पर व्यक्ति में इस तत्व का संचार होने लगता है. लेकिन इसका पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए साधक का विशुद्ध चक्र जागृत होना आवश्यक है। इस प्रकार वह अमृत तत्व कुदरती रूप से नाभि में एकत्रित होने लगता है या फिर उसका कई प्रकार से संचार साधक के लिए संभव हो जाता है।

इस समय दैवीय शक्तियां पृथ्वी लोक पर विचरण करती है. उनकी दैवीय शक्तियां और आशीर्वाद पाने के लिए ब्रम्ह मुहूर्त में उठना पड़ता है।

ब्रम्ह मुहूर्त में किया गया स्नान सर्वश्रेष्ठ फल देता है। स्नान करते समय ब्रम्ह परमात्मा का चिंतन करें तो यह ब्रम्ह स्नान कहलाता है और देव नदियों का स्मरण करें तो देव स्नान कहलाता है. इस समय स्नान करने से तीनों दोष शांत रहते है और मन और बुद्धि बलवान होते है।

ब्रम्ह मुहूर्त में तामसी शक्तियां सुप्तावस्था में होती है। मन और बुद्धि सकारात्मक होती है. ध्यान जल्दी लगता है। इस समय स्मरण शक्ति तीव्र रहती है।

इसीलिए ब्रम्ह मुहूर्त पर उठकर ध्यान योग करना बोझ ना समझे . ये मनुष्य होने का उपहार समझ अपनाए और इस अमृत वेला का पूर्ण लाभ उठाये।

दैवीय आशीर्वाद का समय

ब्रह्म मुहूर्त को देवताओं का समय भी माना जाता है। इस समय दैवीय शक्तियाँ पृथ्वी पर विचरण करती हैं, और उनके आशीर्वाद से व्यक्ति का जीवन धन्य हो जाता है। इस समय उठकर ध्यान, स्नान, और योग करने से व्यक्ति को दैवीय आशीर्वाद प्राप्त होते हैं, जो जीवन के सभी क्षेत्रों में उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

प्रकृति से जुड़ने का समय

ब्रह्म मुहूर्त में वातावरण शुद्ध और शांत होता है, और इस समय की हवा में अधिक प्राणवायु होती है। इस समय किया गया योग और ध्यान व्यक्ति को प्रकृति के साथ गहरे से जोड़ता है, जिससे उसके भीतर शांति और संतुलन की भावना उत्पन्न होती है।

निष्कर्ष

ब्रह्म मुहूर्त का समय जीवन में असीमित लाभ प्रदान करता है। यह समय न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी खोलता है। इस अमृत वेला को अपनाना और इसका पूर्ण लाभ उठाना मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उपहार है।

इसलिए, ब्रह्म मुहूर्त में उठकर ध्यान, योग, और साधना को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, और इस पवित्र समय का संपूर्ण लाभ प्राप्त करें।