योग मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली क्रिया है। मस्तिष्क शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह ज्ञानेन्द्रियों और शरीर के सभी अंगों को नियंत्रित करता है। यह भावनाओं, विचारों और स्मृतियों का केंद्र है।
1. मस्तिष्क पर योग का प्रभाव-
महर्षि पतंजलि ने "चित्तवृत्ति निरोध" को योग कहा है। आसन, प्राणायाम और ध्यान योग के तीन महत्वपूर्ण अंग हैं जो मस्तिष्क को गहराई से प्रभावित करते हैं। योग शरीर को स्वस्थ रखने वाली महत्वपूर्ण क्रिया है। यह न केवल शरीर को, बल्कि मस्तिष्क को भी प्रभावित करता है।
2. मस्तिष्क पर "आसन" का प्रभाव
आसन शरीर के रक्त-संचार को व्यवस्थित करते हैं और रीढ़ को स्वस्थ रखते हैं। रीढ़ के माध्यम से मस्तिष्क का शरीर पर नियंत्रण होता है। रीढ़ पर स्थित नाड़ी तंत्र से मस्तिष्क सभी अंगों को नियंत्रित करता है। आसनों का सीधा प्रभाव शरीर पर पड़ता है।
कुछ ऐसे आसन जो मस्तिष्क के लिए विशेष रूप से लाभकारी हैं।
1. हस्त पाद आसन:
आसन पर खड़े हो जाएं। हाथों को ऊपर करें और श्वास भरते हुए हाथों को ऊपर की ओर खींचें। श्वास छोड़ते हुए आगे झुकें। घुटने सीधे रखें और हाथों को पैरों के पास ले जाने का प्रयास करें। धीरे-धीरे ऊपर उठें और हाथों को नीचे ले आएं। विश्राम करें।
यह आसन रीढ़ और रक्त-संचार को उत्तम बनाता है, जिससे मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बढ़ता है।
2. शशांक आसन:
वज्रासन में बैठें। श्वास भरते हुए हाथों को ऊपर उठाएं और श्वास छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। हथेलियां, कोहनियां और माथा नीचे टिकाएं। धीरे-धीरे ऊपर उठें और वज्रासन में लौटें।
यह आसन रीढ़ के लिए लाभदायक है और मस्तिष्क को सक्रिय करता है।
3. उष्ट्रासन:
वज्रासन में बैठें और घुटनों के बल उठें। धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें और हाथों को एड़ियों पर रखें। स्थिति में कुछ देर रुकें और फिर वापिस आ जाएं।
सावधानी: इस आसन को अपनी क्षमता के अनुसार करें। नए व्यक्ति पूर्ण स्थिति में जाने का प्रयास न करें। यह आसन रीढ़ और नाड़ी तंत्र को सक्रिय करता है और मस्तिष्क के लिए उत्तम है।
4. अधोमुखासन:
पेट के बल लेट जाएं। कोहनियों को मोड़कर हथेलियों को कंधों के पास रखें। पेट को ऊपर उठाएं और सिर को नीचे की ओर रखें। स्थिति में कुछ देर रुकें और फिर वापिस आ जाएं। यह आसन रक्त-संचार को व्यवस्थित करता है और मस्तिष्क की ओर रक्त प्रवाहित करता है।
5. शीर्षासन:
दीवार के सहारे सिर को नीचे टिकाएं और कोहनियों को मोड़कर सिर के पास रखें। पैरों को ऊपर उठाएं और स्थिति में कुछ देर रुकें।
यह कठिन आसन है। रीढ़ और गर्दन की परेशानी वाले व्यक्ति इसे न करें यह आसन मस्तिष्क की ओर रक्त का प्रवाह बढ़ाता है।
6. सर्वांग आसन:
पीठ के बल लेटें और पैरों को ऊपर उठाएं। हाथों का सहारा देते हुए पीठ को ऊपर उठाएं। स्थिति में कुछ देर रुकें और धीरे-धीरे वापिस आ जाएं।
आसन रीढ़ और नाड़ी तंत्र को सक्रिय करता है और मस्तिष्क की ओर रक्त का प्रवाह बढ़ाता है।
मस्तिष्क पर "प्राणायाम" का प्रभाव
प्राणायाम सम्पूर्ण शरीर के लिए ऊर्जादायी होते हैं, विशेषकर मस्तिष्क के लिए। प्राणायाम ऊर्जा को ऊपर की ओर प्रवाहित करता है, जिससे मस्तिष्क सक्रिय होता है।
1. कपालभाति:
पद्मासन या सुखासन में बैठें। पेट को पीछे की ओर दबाते हुए श्वास बाहर छोड़ें और सामान्य गति से श्वास भरें। इस क्रिया को पहले 15 सेकंड करें और अभ्यास का समय बढ़ाएं।
यह कपाल भाग की शुद्धि करती है और मस्तिष्क को सक्रिय करती है।
2. अनुलोम विलोम:
पद्मासन या सुखासन में बैठें। बाएं हाथ को ज्ञान मुद्रा में रखें और दाएं हाथ से दाएं नासिका को बंद करें। बाईं नासिका से श्वास भरें और दाईं से श्वास छोड़ें। इसी प्रकार पांच आवर्तियां करें।
यह प्राणायाम मस्तिष्क को संतुलित करता है।
3. भ्रामरी प्राणायाम:
आरामदायक स्थिति में बैठें। आंखें बंद करें और कानों को अंगूठों से बंद करें। लंबा श्वास भरें और 'उँ' की आवाज निकालें। पांच आवर्तियां करें।
यह क्रिया मस्तिष्क को गहराई से प्रभावित करती है।
ध्यान योग
सभी आसन और प्राणायाम करने के बाद ध्यान का अभ्यास करें।
पद्मासन या सुखासन में बैठें। आँखें बंद करें और मन को श्वासों पर केंद्रित करें। धीरे-धीरे ध्यान को आज्ञा चक्र (माथे के बीच) में केन्द्रित करें और ज्योति- पुञ्ज का अवलोकन करें।
योग मस्तिष्क को स्वस्थ और सक्रिय रखने का एक प्रभावी तरीका है। नियमित अभ्यास से मस्तिष्क की शक्ति और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।

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